Changes In e Way Bill: जीएसटी ई वे बिल सिस्टम में बड़े बदलाव हुए, जानिए नए नियम

Changes In e Way Bill: जीएसटी ई वे बिल सिस्टम में बड़े बदलाव हुए, जानिए नए नियम




अगर आप जीएसटी रजिस्टर्ड कारोबारी हैं तो आपके लिए काम की खबर है। ई-वे बिल में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहे हैं। अब ई-वे बिल सिस्टम में ऐसी व्यवस्था कर दी गई है जिससे रूट की दूरी की गणना ऑटोमैटिक तरीके से होगी। ये दूरी पोस्टल पिन कोड के जरिए तय होगी।

अब सप्लायर्स और सामान रिसीव करने वाले के पते के हिसाब से दूरी की गणना होगी। यूजर सिर्फ इस दूरी से 10 प्रतिशत दूरी को दर्शा पाएगा। मान लो 2 पिन कोड के बीच 655 किलोमीटर की दूरी है तो सप्लायर अधिकतम दूरी 720 किलोमीटर (655+65) दिखा सकेगा। अगर दोनों पिनकोड समान है तो यूजर अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी दर्ज कर सकेगा। अगर किसी ने ईवे बिल में अवैध पिनकोड डाला तो डिपार्टमेंट इसकी समीक्षा करेगा।

अब एक इनवॉयस पर एक ही ई-वे बिल जनरेट किया जा सकेगा। अब तक 1 इनवॉयस पर कई ई वे बिल जनरेट हो रहे थे। अगर एक बार एक इनवॉयस से ई-वे बिल जनरेट हो गया तो फिर कनसाइनर, कनसाइनी और ट्रांसपोर्टर दूसरा बिल जनरेट नहीं कर सकेंगे।

कनसाइनमेंट ट्रांजिट में होने पर ई वे बिल का एक्सटेंशन किया जा सकेगा। एक्सटेंशन के समय यूजर से पूछा जाएगा कि गुड्स ट्रांजिट में है या मूवमेंट में है। ट्रांजिट चुनने पर ट्रांजिट की जगह का पता भी देना होगा। मूवमेंट चुनने पर सिस्टम यूजर से जगह और वाहन की जानकारी मांगेगा। इन दोनों ही सूरत में दूरी नापने के लिए पिन कोड ई वे बिल के पार्ट ए से लिया जाएगा।

जीएसटी एक्ट के तहत कंपोजिशन टैक्स पेयर्स को अंतर राज्यीय कारोबार की अनुमति नहीं है। इसलिए अगर कारोबारी कंपोजिशन डीलर है तो वो इंटर स्टेट कारोबार के लिए ईवे बिल नहीं जनरेट कर पाएगा।

ई वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक बिल है जिसे जीएसटी में रजिस्टर्ड कारोबारियों को जनरेट करना होता है। कोई बी जीएसटी रजिस्टर्ड कारोबारी 50 हजार रुपए से ज्यादा का सामान बिना ईवे बिल के नहीं भेज सकता है। ये बिल की जानकारी आप ewaybill.nic.in पर जाकर ले सकते हैं। इस कदम के बाद जीएसटी में टैक्स चोरी पर लगाम लगने की भी उम्मीद है। दूसरी तरफ इस कदम से कारोबारियों की सुविधा भी बढ़ेगी।

ई वे बिल जनरेट करने के लिए इनवॉयस, बिल सप्लाई और चालान की जरूरत होगी। इसके अलावा रोड से ट्रांसपोर्ट करने के पर व्हीकल नंबर या ट्रांसपोर्टर की आईडी देनी होगी। रेल, एयर और शिप से ट्रांसपोर्ट करने पर ट्रांसपोर्टर आईडी, ट्रांसपोर्ट डॉक्यूमेंट नंबर और डॉक्यूमेंट की तारीख होनी चाहिए।


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